Artha Vijnana

सफ़लता

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सफ़लता

By:

Vishesh Agarwal

SY B.Sc. 2023-2027

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सिर्फ इंतज़ार है उस पल का।

जब छोटी खुशियां भी होंगी जैसे एक सफलता।

इन आंसुओं का वज़न जो संभाल ना पाती यह आंखें।

महसूस कराती हर लम्हा हल्का ।

उम्मीदों के जुगनू बसे घने जंगलों में।

डर का चांद निकला रात के अंधेरों में।

मकसद से अंजान जीव निकल गया खुद की तलाश में।

पाया खुद को उसने हकीकत के समंदरो में ।

हकीकत के समंदरो में वो डूबता चला गया।

दी दस्तक उसने खुदा के चरणों में।

पूछी खुदा से परिभाषा जिंदगी की उसने।

मालूम हुआ कि सब कुछ बसा है सिर्फ़ कर्मों ।

वक्त हावी था उसके जबीं पे।

पहुँच गया वो हकीकत के ज़मीन पे।

चाहा था उसने की अंत में सफलता मिलेगी उसे

और गुज़ार दी जिंदगी उसने इसी यकीन पे ।